Teri bahut yaad aati hia MAA!

की कल, कल जब उठ कर काम पे जा रहा था,
तो अचानक लगा कोई रोक लेगा
मुझे लगा कोई कहेगा खड़े होकर नाश्ता मत कर हजम नहीं होगा।।

मन में सोचा माँ रसोई से बोली होगी जिसके हाथों में सना आता होगा,
पलट कर देखा तो क्या मालूम था वहां सिर्फ सन्नाटा होगा।।

तुम होती माँ तो आवाज दे कर सुबह उठाती,
बीमार पड़ता तो रो रो कर नजर उतरती ।

स्कूल से आने पर खाना खिलती,
पापा के डान्ट का डर दिखाती,
कहती इसे नौकरी मिल जाए, तरक्की करे, दुवाओं में हाथ उठाती।।

पर तरक्की के लिए घर छोड़ देगा
ये सोच कर दरवाजे के पीछे छुप छुप कर आंसू बहाती,

आज सब कुछ है माँ, सब कुछ
तरक्की की हर रेखा तेरे बेटे को छू के जाती है,
पर माँ हमें तुम्हारी बहुत याद आती है।।

Comments